राजा मान सिंह जी की वाणी
और कलाली मिली जो सगरी ,
जिन गंदो ही गंदो शराब पिलायो ।
असल कलाळ मिल्या गुरु दाता
घोळ के शुद्ध अमिरस पायो ।
गन्दी शराब में जूते चखें,
नित जाय के कीच ते मुख लपटायो ।
असली मद गुरु दाता पायो ,
जिसे पीते ही चकचूर बनायो ।
लानत है ऐसे मरदों को ,
जिन गन्दी शराब से प्रेम बढ़ायो ।
देव सी योनि मिली मानुष तन ,
देव ही होय के श्वान कहायो ।
मान कहे अब मानो रे यारो ,
साफ कयो जैसो मद पायो ।
देवनाथ किरपा करके मेरो ,
डूबतडो मेरो जनम बचायो ।।