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Thursday, July 23, 2026

राजा मान सिंह जी की वाणी 


और कलाली  मिली  जो सगरी ,

जिन गंदो ही गंदो शराब पिलायो ।

असल कलाळ मिल्या गुरु दाता 

घोळ के शुद्ध अमिरस  पायो ।


गन्दी  शराब में जूते चखें, 

नित जाय के कीच ते मुख लपटायो ।

असली मद गुरु दाता  पायो ,

 जिसे पीते ही चकचूर बनायो ।


लानत है ऐसे मरदों को ,

जिन गन्दी  शराब से प्रेम बढ़ायो ।

देव सी योनि मिली मानुष तन ,

देव ही होय के श्वान कहायो ।


मान कहे अब मानो रे यारो ,

साफ कयो जैसो मद पायो  ।

देवनाथ किरपा करके मेरो ,

डूबतडो  मेरो जनम बचायो  ।।