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Friday, July 24, 2026


चालो उण देश में रे जोगिया,

 जहाँ नहीं मजहब नहीं पन्थ ॥ टेर ॥

चार वेद षट शास्त्र नहीं रे जोगिया, 

नहीं धरम नहीं ग्रन्थ। 

अल्ला राम दोनों नहीं रे जोगिया, 

नहीं स्वर्ग न जिन्नत ॥

ना वैकुण्ठ ना बहिश्त है रे जोगिया, 

नर्क दोजख ना कहन्त।

ना कोई पंडित काजी मुल्ला रे जोगिया,

 ना कोई संत महन्त ॥

जीव ब्रह्म दोनों नहीं रे जोगिया, 

जहाँ है सबको अनंत। 

रति पुरान कुरान नहीं रे जोगिया, 

सबसे अलग रहन्त ॥

देवनाथ गुरु गह्यो रे जोगिया,

 जब ये बात लखन्त ।

 मानसिंह आनन्द सदा रे जोगिया, 

अपने में आप बसन्त ॥