॥ दोहा ॥
दोपारे सारंग भली,
सोरठ भली अधरात ।
कर जो समझ विचार ने,
ओ समय देखने बात ।।
काल की बात तू छोड़ परी
और आज करे उन पे चित दीजे ।
काल करो तो फेर करो तुम
काल करो तब को अटकीजे ।
काल को ख्याल तो करताँ ही करता
काल के गाल में जाय वसीजे ।
काल की बात को छोड़ दे मान
तू आज करे सो अबी कर लीजे ।।