| अब मैं सरण तिहारी जी, मोहि राखौ कृपा निधान hghgfhgf567657 अजामील अपराधी तारे, तारे नीच सदान। जल डूबत गजराज उबारे, गणिका चढ़ी बिमान। fdhfh65634 और अधम तारे बहुतेरे, भाखत संत सुजान। कुबजा नीच भीलणी तारी, जाणे सकल जहान। कहं लग कहूँ गिणत नहिं आवै, थकि रहे बेद पुरान। मीरा दासी शरण तिहारी, सुनिये दोनों कान। jjjjfjjjy654545fgh5454gh56 |
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Monday, October 2, 2023
अब मैं सरण तिहारी जी,
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