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Tuesday, June 30, 2026

आवे ना जावे,
मरे नहीं जन्मे,
 सोई निज पीव हमारा हो ।


 ना प्रथम जननी ने जनमो,
 ना कोई सिर जन हारा हो ॥
. साधनसिद्ध मुनि ना तपसी,
 ना कोई करत आचारा हो ।
 ना खट दर्शन चार बरन में,
 ना आश्रम व्यवहारा हो ॥

 आवे ना जावे,
 मरे नहीं जन्मे
 सोई निज पीव हमारा हो...


 ना त्रिदेवा सो हम शक्ति,
 निराकार से पारा हो ।
 शब्द अतीत अचल अविनाशी,
 छर अक्षर से न्यारा हो ॥

 आवे ना जावे,
मरे नहीं जन्मे
 सोई निज पीव हमारा हो...


 ज्योति स्वरुप निरंजन नाही,
 ना ओम हुंकारा हो ।
 धरनी ना गगन,पवन ना पानी,
 ना रवि चंदा तारा हो ॥

 आवे ना जावे,
मरे नहीं जन्मे
 सोई निज पीव हमारा हो...


 है प्रगट पर दिसत नाही,
 सतगुर सैन सहारा हो ।
 कहे कबीर सब घट में ही साहिब,
 परखो परखन हारा हो ॥

 आवे ना जावे,
मरे नहीं जन्मे
 सोई निज पीव हमारा हो...