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Saturday, September 30, 2023

ई घोड़ा चौगान



ई घोड़ा चौगान मायला 
मुरजी व्हे' तो मान, 
 नीतर ई घोड़ा चौगान। 
नीतर ई घोड़ा चौगान, 

मनवा मुरजी व्हे तो मान। 
नीतर ई घोड़ा चुगान।। 

दीधाँ लागे डाम देह पे, 
घट में उपजे ज्ञान। 
आंखांरी आशे नी आवे, 
कई करे जद कान।। 

भलां बुरो ने पाप पुन्न थूं, 
कश्यो न सके पछाण। 
थारी कशो अजाणी पण थूं , 
जाण वणे अणजाण।। 

सूतो व्हे' तो सहजां जागे, 
जाण शके अण जाण। 
जागत सूतो जाणत गे'लो, 
जाग शके नी जाण।। 

आगे आगे भाग रियो थूं, 
हेर रियो हेराण। 
पाछे पाछे दौड़ रियो थू, 
कद को ई कल्याण।।

 मनखा देही मूंगी पाई, 
पाई सन्त पछाण। 
पाई परी गमाई जद तो, 
चतारु मूढ समान।।

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