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Sunday, June 7, 2026

 चलना है दूर मुसाफिर,काहे सोवे रे,

काहे सोवे रे..मुसाफिर! काहे सोवे रे,

चेत-अचेत नर सोच बावरे,

बहुत नींद मत सोवे रे,

काम-क्रोध-मद-लोभ में फंसकर

उमरिया काहे खोवे रे,

चलना है दूर मुसाफिर,काहे सोवे रे |

सिर पर माया मोह की गठरी,

संग दूत तेरे होवे रे,

सो गठरी तोरी बीच में छिन गई,

मूंड पकड़ कहाँ रोवे रे,

चलना है दूर मुसाफिर,काहे सोवे रे |

रस्ता तो दूर कठिन है,

चल अब अकेला होवे रे,

संग साथ तेरे कोई ना चलेगा,

काके डगरिया जोवे रे,

चलना है दूर मुसाफिर,काहे सोवे रे |

नदिया गहरी,नांव पुरानी,

केही विधि पार तू होवे रे,

कहे कबीर सुनो भाई साधो,

ब्याज धो के मूल मत खोवे रे,

चलना है दूर मुसाफिर,काहे सोवे रे |