| कृष्ण मंदिरमों मिराबाई नाचे तो ताल मृदंग रंग चटकी। पावमों घुंगरू झुमझुम वाजे। तो ताल राखो घुंगटकी॥१॥ dfdfdfdfddfd नाथ तुम जान है सब घटका मीरा भक्ति करे पर घटकी॥टेक॥ ध्यान धरे मीरा फेर सरनकुं सेवा करे झटपटको। सालीग्रामकूं तीलक बनायो भाल तिलक बीज टबकी॥२॥ sddsfdsfdsdsfsfssdf बीख कटोरा राजाजीने भेजो तो संटसंग मीरा हटकी। ले चरणामृत पी गईं मीरा जैसी शीशी अमृतकी॥३॥ dfdfdfdddsdsfd घरमेंसे एक दारा चली शीरपर घागर और मटकी। मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर। जैसी डेरी तटवरकी॥४॥ fdfdsfdsfdfd jfggfhgfhfh |
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Monday, October 2, 2023
कृष्ण मंदिर मों मिराबाई नाचे
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