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Monday, October 2, 2023

कृष्ण मंदिर मों मिराबाई नाचे

           
 कृष्ण मंदिरमों मिराबाई नाचे
 तो ताल मृदंग रंग चटकी।
 पावमों घुंगरू झुमझुम वाजे।
 तो ताल राखो घुंगटकी॥१॥
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 नाथ तुम जान है सब घटका
 मीरा भक्ति करे पर घटकी॥टेक॥

 ध्यान धरे मीरा फेर सरनकुं
 सेवा करे झटपटको।
 सालीग्रामकूं तीलक बनायो
 भाल तिलक बीज टबकी॥२॥
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 बीख कटोरा राजाजीने भेजो
 तो संटसंग मीरा हटकी।
 ले चरणामृत पी गईं
मीरा जैसी शीशी अमृतकी॥३॥
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 घरमेंसे एक दारा चली
शीरपर घागर और मटकी।
 मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर।
 जैसी डेरी तटवरकी॥४॥

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