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Sunday, July 5, 2026

 ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियां 

    

ठुमक चलत रामचंद्र 

बाजत पैंजनियां ..

किलकि किलकि उठत धाय, 

गिरत भूमि लटपटाय .

धाय मात गोद लेत ,

दशरथ की रनियां ..

अंचल रज अंग झारि, 

विविध भांति सो दुलारि .

तन मन धन वारि वारि,

कहत मृदु बचनियां ..

विद्रुम से अरुण अधर,

बोलत मुख मधुर मधुर .

सुभग नासिका में चारु,

लटकत लटकनियां ..

तुलसीदास अति आनंद, 

देख के मुखारविंद .

रघुवर छबि के समान, 

रघुवर छबि बनियां ..