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Saturday, September 30, 2023

मैया मोरी में नहिं माखन खायो



मैया मोरी में नहिं माखन खायो 

भोर भयो गैयन के पाछे, 
मधुवन मोहिं पठायो ।
 चार पहर बंसीबट भटक्यो,
 साँझ परे घर आयो || 
hghghggghgg
मैं बालक बहिंयन को छोटो,
 छींको किहि बिधि पायो । 
ग्वाल बाल सब बैर परे हैं, 
बरबस मुख लपटायो ॥

hghgfhfggg
 तू जननी मन की अति भोरी 
इनके कहे पतिआयो । 
जिय तेरे कछु भेद उपजि है, 
जानि परायो जायो ॥

hgfhghggh
 यह ले अपनी लकुटि कमरिया,
 बहुतहिं नाच नचायो ।
 सूरदास तब बिहँसि जसोदा
 ले उर कंठ लगायो ॥

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