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Saturday, July 4, 2026

मैली चादर ओढ़ के कैसे, द्वार तुम्हारे आऊँ ।


मैली चादर ओढ़ के कैसे, द्वार तुम्हारे आऊँ ।
 हे पावन परमेश्वर मेरे, मन ही मन शरमाऊं ॥

 तूने मुझको जग में भेजा, निर्मल देकर काया ।
 आकर के संसार में मैंने, इसको दाग लगाया ।
 जनम जनम की मैली चादर, कैसे दाग छुड़ाऊं ॥

 निर्मल वाणी पाकर मैने, नाम न तेरा गाया ।
 नयन मूंद कर हे परमेश्वर, कभी न तुझको ध्याया ।
 मन वीणा की तारें टूटीं, अब क्या गीत सुनाऊं ॥


 इन पैरों से चल कर तेरे मन्दिर कभी न आया ।
 जहां जहां हो पूजा तेरी, कभी न शीश झुकाया।
 हे हरि हर, मैं हार के आया,
 अब क्या हार चढ़ाऊं ॥