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Sunday, July 5, 2026

बाबूजी मेरा टिकिट क्यूँ  लेता 

 

     म्हारो खरोचों मालिक पुरे,
में वाका नाम पे रेता
बाबूजी मेरा टिकट क्यों लेता।।

तीन गुणा रा डब्बा बनाया,
मन का इंजन जोता
काम क्रोध का भुक्या कोयला 
इसमें चेतन सीटी देता
।।

 बाबूजी मेरा टिकट क्यों लेता
 म्हारो खरोचों मालिक पुरे,
 में वाका नाम पे रेता
बाबूजी मेरा टिकट क्यों लेता।।


 तीरथ वासी आया रेल में ,
आवागमन में रहता
माया को नहीं बांधा
गाठड़ी कोड़ी पास नहीं रहता

बाबूजी मेरा टिकट क्यों लेता
म्हारो खरोचों मालिक पुरे
, में वाका नाम पे रेता
बाबूजी मेरा टिकट क्यों लेता।।

 राता पीला सिगनल बनाया ,
सोहंग तार खिचाता
अड़ा उड़द का लीदा
आसरा ऐसी लेन जमाता


बाबूजी मेरा टिकट क्यों लेता
म्हारो खरोचों मालिक पुरे,
 में वाका नाम पे रेता
 बाबूजी मेरा टिकट क्यों लेता।।

 निर्भय होकर आया जगत में,
 दाम पास नही रेता,
माया की नही बांधा गाँठड़ी,
मैं तो वह वनियारा में रेता,

 बाबूजी मेरा टिकट क्यों लेता
म्हारो खरोचों मालिक पुरे,
में वाका नाम पे रेता
बाबूजी मेरा टिकट क्यों लेता।।

अरे अमरापुर सु चींटी उतरी
 हेलो पाड़ के देता
 अरे गुजर गरीबी में कनीराम बोले
अमर पास कर लेता

बाबूजी मेरा टिकट क्यों लेता
म्हारो खरोचों मालिक पुरे,
 में वाका नाम पे रेता
 बाबूजी मेरा टिकट क्यों लेता।।