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Sunday, October 1, 2023

लोक लाज सब खोये फकीरी

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लोक लाज सब खोये फकीरी,
 निर्भय पड़ा निर्मोही

 अम्बर ओडन भूमि पथराना,
 बिछ मचाना सोया
 भूत पलित की शंका ना लगे,
 जीवंत मुर्दा होए फकीरी ||
 निर्भय पड़ा निर्मोह
फकीरी लोक लाज सब खोये

 निर्भय पड़ा निर्मोह दिखते मुर्दा,
 है वो चेतन जान सके ना कोई
 उनकी गत तो वही जाने,
 नहीं हंसे नहीं रोय फकीरी
 लोक लाज सब खोय फकीरी,
 निर्भय पड़ा निर्मोही ||

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 आवत जावत श्वास जकोड़ा,
 हर दम हिरदा को |टेर|
 कुंड कपट का शस्य मिटाया,
 कुंड कपट का दागा मिटाया
 भ्रम रहा नहीं कोई फकीरी,
 लोक लाज सब खोये फकीरी,
 निर्भय पड़ा निर्मोही ||
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 सम द्रष्टि से राग मटिया,
 अगम अगोचर होये ||टेर||
 कर्म अतीत फिरे जग माय,
 कर्म रहा नहीं कोई फकीरी
 लोक लाज सब खोये फकीरी,
 निर्भय पड़ा निर्मोही ||

 पार भ्रम का दर्शन पाया,
 सूरत सोहम में पोय ||टेर||
 गोपीचर अज्मेसर चरणे,
 जन्म मरण नहीं होए फकीरी
 लोक लाज सब खोये फकीरी,
 निर्भय पड़ा निर्मोही ||  
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