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Wednesday, June 10, 2026

 संत मिल्या इतना टळे,
 काळ जाळ जम चोट।
 शीश नमाया गिर पड़े,
 लख पापन की पोट।
 में सुमरू शारद माय ,
 शारदा तू साची।
लागु गजानन्द पाय,
 गुरुजी ने निमण करु।

 सुरता रंग महल चाल ,
 फुलड़ा री सेज बिछी।
 थोड़ो ज्ञान गोकडे हाल,
सुखमण री सेज बिछी।

 गुरु बिना मिलिया नी ज्ञान,
भजन बिना मुक्ति नही।
 ओ हो। .. नही देवलिया में देव,
 झालर थे कुटो मती।
 धुप ज्योरो अग्न जले,
वासना तो पवन बखी।
 सुरता रंग महल चाल ,
फुलड़ा री सेज बिछी।
थोड़ो ज्ञान गोकडे हाल,
सुखमण री सेज बिछी।

 गुरु बिना मिलिया नी ज्ञान,
भजन बिना मुक्ति नही।
 नही नेणो में नीर ,
आलसी री गरज कसी।
 दिन रेण एकण भाव,
भोण भले उगो मती।
 सुरता रंग महल चाल ,
फुलड़ा री सेज बिछी।
थोड़ो ज्ञान गोकडे हाल,
सुखमण री सेज बिछी।

 गुरु बिना मिलिया नी ज्ञान,
 भजन बिना मुक्ति नही।

 अरे नही भुजा में जोर,
सूरो संग चढो मती।
 भीड़ पड़े भाग जाय,
बगत री गरज कसी।
सुरता रंग महल चाल ,
फुलड़ा री सेज बिछी।
 थोड़ो ज्ञान गोकडे हाल,
सुखमण री सेज बिछी।

 गुरु बिना मिलिया नी ज्ञान,
भजन बिना मुक्ति नही।

ओ हो। .. डगमग डुले जीव,
 हरी भक्ति झेलो मती।
 तप बिना मिलिया नी राज,
बोल्या गोरख जती।
सुरता रंग महल चाल ,
फुलड़ा री सेज बिछी।
थोड़ो ज्ञान गोकडे हाल,
सुखमण री सेज बिछी।

गुरु बिना मिलिया नी ज्ञान,
भजन बिना मुक्ति नही।

 में सुमरू शारद माय ,
शारदा तू साची।
लागु गजानन्द पाय,
गुरुजी ने निमण करु।
सुरता रंग महल चाल ,
 फुलड़ा री सेज बिछी।
थोड़ो ज्ञान गोकडे हाल,
सुखमण री सेज बिछी।

गुरु बिना मिलिया नी ज्ञान,
भजन बिना मुक्ति नही।