| tryyr 675 आण मिल्यो अनुरागी गिरधर आण मिल्यो अनुरागी ।।टेक।। hghfgh56564 साँसों सोच अंग नहि अब तो तिस्ना दुबध्या त्यागी। मोर मुकुट पीताम्बर सोहै, स्याम बरण बड़ भागी। जनम जनम के साहिब मेरो, वाही से लौ लागी। अपण पिया सैग हिलमिल खेलूं अधर सुधारस पागी। मीराँ के प्रभु गिरधरनागर, अब के भई सुभागी।। kkkkkgkg fgjh7657567g |
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