Tuesday, June 9, 2026

जो करुनाकर तुम्हारा ब्रज में
 फिर अवतार हो जाए
 तो भक्ति का चमन उजड़ा
हुआ गुलज़ार हो जाए

 गरीबों को उठा लो सांवले
 गर अपने हाथों से तो
 इसमें शक नहीं दोनों का
 जीर्णोधार हो जाए

 लुटा कर दिल जो बैठे है,
 वोह रो रो कर यह कहते हैं
 किसी सूरत से सुन्दर श्याम का
 दीदार हो जाए

 सुना दो रसमयी अनुराग की
 वोह बांसुरी अपनी
 की जिसकी तान की
तार तन में पैदा तार हो जाए


 पड़ी भाव सिन्धु में है
दीनो के दृगबिंदु की नैय्या
 कंहैय्या तुम सहारा दो तो
 बेडा पार हो जाए

 जो करूणा कर तुम्हारा ब्रज में
 फिर अवतार हो जाए
 जो करूणाकर तुम्हारा ब्रज में
 फिर अवतार हो जाए
 तो भक्ति का चमन उजड़ा
 हुआ गुलज़ार हो जाए