गुरां सा ओल्यू आपकी आवे
गुरां सा ओल्यू आपकी आवे
याद करूं तो रोउ हिरदा में,
पल प्रेम सतावे।
चैत में चिंता घनी लागे ,
बिन कोण मिटावे।
आप गुरां सा पर उपकारी ,
सतवाली रह बतावे।
गुरां सा ओल्यू आपकी आवे
याद करूं तो रोउ हिरदा में,
पल पल प्रेम सतावे।
वैशाखां भँवरा ज्यू भटकूं ,
बाग नजर नहीं आवे
खिलरया फूल लिपट रही कलियाँ
फुलां जाय समावे।
गुरां सा ओल्यू आपकी आवे
याद करूं तो रोउ हिरदा में,
पल पल प्रेम सतावे।
जेठ मास गर्मी को महीनो,
जाल बिन प्यास सातवे।
आप गुरन सा सागर समाना
भर भर प्याला पावे.
गुरां सा ओल्यू आपकी आवे
याद करूं तो रोउ हिरदा में,
पल पल प्रेम सतावे।
आषाढ़ में आसा घनी लागे
गुरु बिन कोण मिटावे।
आप गुरन सा इंद्र समाना
झीणी झीणी बूंदें बरसावे
गुरां सा ओल्यू आपकी आवे
याद करूं तो रोउ हिरदा में,
पल पल प्रेम सतावे।
सावन में सायब घर आवे
सखियाँ मंगल गावे
मंगलाचार बधावा गावे
जय गुरा ने बधावे
गुरां सा ओल्यू आपकी आवे
याद करूं तो रोउ हिरदा में,
पल पल प्रेम सतावे।
भादवो भक्ति को महीनो
गुरु बिन कोण जगावे
जेठूराम गुरन जी के शरणे
भाग पुरबला पावे
गुरां सा ओल्यू आपकी आवे
याद करूं तो रोउ हिरदा में,
पल पल प्रेम सतावे।