| hfgh5667455745 मैं तो सांवर के रंग राची । कोई के पिया परदेश बसत हैं लिख-लिख भेजै पाती । मेरा पिया मेरे हिये बसत है ना कहुँ आती जाती । ghjgf675 और सखी मद पी-पी माती, मैं बिन पीयाँ ही माती । प्रेमभठीकों मैं मद पीयो, छकी फिरूँ दिन-राती । पीहर बसूं न बसूं सास घर, सतगुरू संग लजानी । दासी मीरा के प्रभु गिरधर, हरि चरणन की मैं दासी । ghjhgjhgh674fffg467j |
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