Sunday, June 7, 2026

 हर भज हर भज हीरा परख ले, 

समझ पकड़ नर मजबूती ।

अष्ट कमल पर खेलो मेरे दाता, 

और बारता सब झूठी ॥टेर॥

इन्द्र घटा ज्यूँ म्हारा सतगुरु आया, 

आँवत ल्याया रंग बूँटी ।

त्रिवेणी के रंग महल में 

साधा लाला हद लूटी ॥1॥

इण काया में पाँच चोर है, 

जिनकी पकड़ो सिर चोटी ।

पाँचवाँ ने मार पच्चीसाँ ने बसकर, 

जद जाणा तेरी बुध मोटी ॥2॥

सत सुमरण का सैल बणाले, 

ढाल बणाले धीरज की ।

काम, क्रोध ने मार हटा दे, 

जद जाणा थारी रजपूती ॥3॥

झणमण झणमण बाजा बाजै, 

झिलमिल झिलमिल वहाँ ज्योति ।

ओंकार के रणोकार में हँसला 

चुग गया निज मोती ॥4॥

पक्की घड़ी का तोल बणाले, 

काण ने राखो एक रती ।

शरण मच्छेन्द्र जति गोरक्ष बोल्या, 

अलख लख्या सो खरा जती ॥5॥