Sunday, June 7, 2026

 भज मन राम चरण सुखदाई ॥

जिहि चरनन से निकलीं सुरसरि

शंकर जटा समायी ।

जटा सन्करी नाम परयो है

त्रिभुवन तारन आयी ॥

राम चरण सुखदाई ॥

जिन्ह चरणन की चरण पादुका

भरत रह्यो लव लाई ।

सोइ चरण केवट धोइ लीन्हे

तब हरि नाव चलाई ॥

राम चरण सुखदाई ॥