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Sunday, June 7, 2026

 उमरिया धोखे में खोये दियो रे।

धोखे में खोये दियो रे।

पांच बरस का भोला-भाला

बीस में जवान भयो।

तीस बरस में माया के कारण,

देश विदेश गयो। उमर सब ....

चालिस बरस अन्त अब लागे,

 बाढ़ै मोह गयो।

धन धाम पुत्र के कारण,

 निस दिन सोच भयो।।

बरस पचास कमर भई टेढ़ी, 

सोचत खाट परयो।

लड़का बहुरी बोलन लागे, 

बूढ़ा मर न गयो।।

बरस साठ-सत्तर के भीतर, 

केश सफेद भयो।

वात पित कफ घेर लियो है, 

नैनन निर बहो।

न हरि भक्ति न साधो की संगत,

न शुभ कर्म कियो।

कहै कबीर सुनो भाई साधो,

चोला छुट गयो।।