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Sunday, June 7, 2026

घूँघट के पट खोल शखी री 

मिलिहैं, साईं दीदा.रा..

मोह माया की ओढ़नी ओढ़े

दीखे ना.ही. द्वारा..

सुन्न महल में.  घोर अँधेरा

करो ना.म, उजिआरा..

गगन मंडल से अमृत बसरे

होय अनंद , अपारा..

अनहत की धुन, बजे निरंतर

सो.हम का. झंकारा ..

सतगुरु साहेब, की बलिहा.री

बांध सबद का माड़ा..

कहे कबीरा  आपा. खोया

पाया प्राण अधारा ..