Wednesday, June 24, 2026

    
दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी,
 अँखियाँ प्यासी रे |
 मन मंदिर की जोत जगा दो,
 घाट घाट वासी रे ||

 मंदिर मंदिर मूरत तेरी,
 फिर भी न दीखे सूरत तेरी |
 युग बीते ना आई मिलन की
 पूरनमासी रे |


 द्वार दया का जब तू खोले
 पंचम सुर में गूंगा बोले |
 अंधा देखे लंगड़ा चल कर
 पँहुचे काशी रे ||

 पानी पी कर प्यास बुझाऊँ,
 नैनन को कैसे समजाऊँ |
 आँख मिचौली छोड़ो अब तो
 मन के वासी रे ||


 निबर्ल के बल धन निधर्न के,
 तुम रखवाले भक्त जनों के |
 तेरे भजन में सब सुख़ पाऊं,
 मिटे उदासी रे ||
76767657676565686
 नाम जपे पर तुझे ना जाने,
 उनको भी तू अपना माने |
 तेरी दया का अंत नहीं है,
 हे दुःख नाशी रे ||


 आज फैसला तेरे द्वार पर,
 मेरी जीत है तेरी हार पर |
 हर जीत है तेरी मैं तो,
 चरण उपासी रे ||
7
 द्वार खडा कब से मतवाला,
 मांगे तुम से हार तुम्हारी |
 नरसी की ये बिनती सुनलो,

 लाज ना लुट जाए प्रभु तेरी,
 नाथ करो ना दया में देरी |
 तिन लोक छोड़ कर आओ,
 गंगा निवासी रे ||