Thursday, June 11, 2026

अब तो निभायाँ सरेगी,
 बांह गहेकी लाज।।

 समरथ सरण तुम्हारी सइयां,
 सरब सुधारण काज॥

 भवसागर संसार अपरबल,
 जामें तुम हो झयाज।

 निरधारां आधार जगत गुरु
 तुम बिन होय अकाज॥

 जुग जुग भीर हरी भगतन की,
 दीनी मोच्छ समाज।

 मीरां सरण गही चरणन की,
 लाज रखो महाराज॥