Sunday, October 1, 2023

साँवरे से मिलने का

               
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साँवरे से मिलने का,
सत्संग ही बहाना है,
चलो सत्संग में चलें ।
हमें हरी गुण गाना है,
सांवरे से मिलने का,
सत्संग ही बहाना है ॥


मथुरा में ढूंढा तुझे,
गोकुल में पाया है,
वृन्दावन की गलियों में ।
मेरे श्याम का ठिकाना है,
सांवरे से मिलने का,
सत्संग ही बहाना है ॥

बागो में ढूँढा तुझे,
फूलों मे पाया है,
मोगरे की कलियों में ।
 मेरे श्याम का ठीकाना है,
सांवरे से मिलने का,
सत्संग ही बहाना है ॥


 सखियों ने ढूँढा तुझे,
गोपियों ने पाया है,
राधा जी के हृदय में ।
मेरे श्याम का ठीकाना है,
सांवरे से मिलने का,
 सत्संग ही बहाना है ॥

राधा ने ढूंढा तुझे,
 मीरा ने पाया है,
 मैंने तुझे पा ही लिया ।
 मेरे दिल में ठिकाना है,
 सांवरे से मिलने का,
सत्संग ही बहाना है ॥

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महलों मे ढूँढा तुझे,
झोपड़ी में पाया है,
सुदामा की कुटिया में ।
 मेरे श्याम का बसेरा है,
सांवरे से मिलने का,
सत्संग ही बहाना है ॥

 मीरा पुकार रही,
 आओ मेरे गिरधारी,
विष भरे प्याले को ।
 तुम्हे अमृत बनाना है,
सांवरे से मिलने का,
सत्संग ही बहाना है ॥


साँवरे से मिलने का,
 सत्संग ही बहाना है,
चलो सत्संग में चलें ।
 हमें हरी गुण गाना है,
सांवरे से मिलने का,
सत्संग ही बहाना है ॥ 
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