Wednesday, June 10, 2026


सीता से राम बोले दिन आया ढलते ढलते।   

सीता से राम बोले दिन आया ढलते ढलते।
 तेरे पांव थक न जाए मेरे साथ चलते चलते.

 मेरे साथ प्रिय सीता तुमदुःख उठा रही हो
 पैरों में चुभे कांटे और मुस्करा रही हो.
बस जा भंगुर माकेमिट्टी में पलते पलते
 सीता से राम बोले दिन आया ढलते ढलते।


 गए राम को बचाने लक्ष्मण ने खींची रेखा
 चालाक था वो रावण ,रेखा को उसने देखा
 बेईमान बच गया हेअग्नि में जलते जलते
 सीता से राम बोले दिन आया ढलते ढलते।

 साधु समझ के सीता जब भिक्षा देने आई
 कंधे उठा करके जब ले चला कसाई
 कंगन गिराए दोनों सीता ने रोते रोते
 सीता से राम बोले दिन आया ढलते ढलते।


 उस बदन सी नजर यह हाल हुआ ज्ञानी
 लंका जली सोने की सब मिट गई शैतानी
 मरा राम के हाथों से बस हाथ मलते मलते
 सीता से राम बोले दिन आया ढलते ढलते।