Saturday, September 30, 2023

सुण लो जी साँचा वेण



रागन में सोरठ बड़ी, 
तो भोजन में बड़ी खीर , 
नाम बड़ो श्री राम को, 
प्रभु स्नान बड़ो गंगा तीर। 
वह सोरठ एक नार थी, 
आ सोरठ एक राग, 
उन रटिया दुख उपजे, 
इन भजिया उपजे वैराग। 
भूल कबु न कीजिये और, 
चार पुरुषां को संग, 
रोगी भोगी ओर जुहारी, 
पतंग मांजी उदंग।

 सुण लो नी साँचा वेण भीष्म राजा, 
सुण लो जी साँचा वेण।। 

ऐ पांडव हमारा मैं पांडवा रो रे, 
अर्जुन म्हारो साँचो शेण, 
भीष्म राजा सुण लो जी सांचा वेण।।
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 ओ द्रोपदी रो सीर दुशासन खिजियो रे
, ऐ वर्जियो नी बुद्धा ढेण,
 भीष्म राजा सुण लो जी सांचा वेण।। 

राजा दुर्योधन अंधो रो अंधो रे,
 ऐ फूटा रे विणरा नेण, 
भीष्म राजा सुण लो जी सांचा वेण।।
 
गांधारी रो पूत एक नही राखू रे,
 ओ राखु नही पाणी रेण, 
भीष्म राजा सुण लो जी सांचा वेण।।
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पदम् भणे पण पाय लागू रे, 
भगतो को सुख देण, 
भीष्म राजा सुण लो जी सांचा वेण।।
 
सुन लो नी साँचा वेण 
भीष्म सुण लो जी साँचा वेण।।
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