मतकर माया को अहंकार,
आया है सब जाएगा,और राजा रंक फ़क़ीर कोई सिंहासन चड़ चले,और कोई बंधे ज़ंजीर,
पता टूटा डाल से,ले गई पवन उड़ाए, अबके बिछड़े कब मिले,दूर पड़ेंगे जाए,
वृक्ष बोला पात से,और सुनो पात मेरी बात, इस घर की रीत यही,और एक आवे एक जाए,
मतकर माया को अहंकार, मतकर काया को अभिमान, काया गार से काची, काया गार से काची रे, जैसा ओस का मोती, झोंका पवन का लग जाय, झपका पवन का लग जाय, काया धूल हो जासी।
ऐसा सख्त था महाराज, जिनका मुल्कों में नाम, जिन घर झूलता हाथी, जिन घर बंधता हाथी, उण घर दिया ना बाती, झोंका पवन का लग जाय, झपका पवन का लग जाय, काया धूल हो जासी, मत कर काया को अभिमान, काया गार से काची।
भरिया सिंदड़ा में तेल जासे, रच्यो है सब खेल, जल रही दिया री बाती, जैसा ओसरा मोती, झोंका पवन का लग जाय, झपका पवन का लग जाय, काया धूल हो जासी, मत कर काया को अभिमान, काया गार से काची।
खुट गया सिंदड़ा रो तेल, बिखर गया सब नट खेल, बुझ गई दिया री बाती, जैसा ओसरा मोती, झोंका पवन का लग जाय, झपका पवन का लग जाय, काया धूल हो जासी। मत कर काया को अभिमान, काया गार से काची।
ये तो लालों मैं का लाल, तेरा कौन क्या हवाल, जिनको जम ले जासी, जैसा ओसरा मोती, झोंका पवन का लग जाय, झपका पवन का लग जाय, काया धूल हो जासी। मत कर काया को अभिमान, काया गार से काची।
झूठा माय थारा बाप, झूठा सकल परिवार, झूठी कूटता छाती, जैसा ओसरा मोती। जैसा ओसरा मोती, झोंका पवन का लग जाय, झपका पवन का लग जाय, काया धूल हो जासी। मत कर काया को अभिमान, काया गार से काची।
बोल्या भवानीनाथ गुरूजी ने, सिर पे धरिया हाथ, जासे मुक्ति हो जासी, जैसा ओसरा मोती, झोंका पवन का लग जाय, झपका पवन का लग जाय, काया धूल हो जासी। मत कर काया को अभिमान, काया गार से काची। hghgfhfggfh656565 5464645 gfgs
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