हे रूणीचे रा धणियाँ,
हे रूणीचे रा धणियाँ,
अजमाल जी रा कँवरा,
माता मेणादे रा लाल,
राणी नेतल रा भरतार,
म्हारो हेलो,
सुणो नी रामा पीर जी ॥
घर – घर होवे पूजा थांरी,
गाँव – गाँव जस गावे जी ।
जो कोई लेवे नाम धणी रो,
मन चाया फळ पावे जी ।
हे रामसा पीर थारी,
ड्योढी पर शीश झुकावाँ,
मनड़े रा फूल चढ़ावाँ,
हे रूणीचे रा धणियाँ,
अजमाल जी रा कँवरा ।।
थे तो बाबा मालिक म्हारा,
म्हे हाँ थारा दास जी ।
म्हां पर किरपा की जो बाबा,
टाबर अपणा जाण जी ।
श्वारथिया रो जहर उतारो,
घड़ी पलक री सासा,
बन्धावो म्हाने आशा,
हे रूणीचे रा धणियाँ,
अजमाल जी रा कँवरा ।।
दास करे अरदास पीर जी,
डसगयो काळो नाग जी ।
मरतोड़ा ने जीव दान दो,
जीतां ने वरदान जी ।
महिमा अपरम्पार थांरी,
धन – धन भाग्य विधाता,
थाने घणी खम्मा अन्नदाता,
हे रूणीचे रा धणियाँ,
अजमाल जी रा कँवरा ॥