काया ने सिंगार कोयलिया
पर मंडली मत ज्याजे रै,
पर मंडली रा नहीं भरोसा
अध बिच में रुळ ज्याज्यो रै,
खार समुन्द्र रो खारो पाणी
वो पानी मत ल्या जे रै,
थोड़ा नीर घणो कर मानो
नीर गंगाजल ल्याईज्यो रै,
काया ने सिंगार कोयलिया
पर मंडली मत ज्याजे रै,
पर मंडली रा नहीं भरोसा
अध बिच में रुळ ज्याज्यो रै।
गहरों फूल रोहिड़ा रो कहिजे
वो फूलडा मत ल्याईज्यो रै,
वो तो फूल घणा कर मानों
फूल हज़ारी गुल ल्या जे रै,
काया ने सिंगार कोयलिया
पर मंडली मत ज्याजे रै,
पर मंडली रा नहीं भरोसा
अध बिच में रुळ ज्याज्यो रै।।
उजड़ वन में ऊबो रै खेजड़ो
उन छाया में मत ज्या ज्ये रै,
अगम पछम रो बाजे बायरियो
काटो में रुळ जावो रै,
काया ने सिंगार कोयलियाँ
पर मंडली मत ज्याजे रै,
पर मंडली रा नहीं भरोसा
अध बिच में रुळ ज्याज्यो रै,
बाई रे मीरा ने गिरधर मिलियाँ
उण मंडली भलो ज्याई ज्यो रै,
उण मंडलीरा साँचा भरोसा
डुबतड़ा तिर ज्याईज्यो रै,
काया ने सिंगार कोयलिया
पर मंडली मत ज्याजे रै,
पर मंडली रा नहीं भरोसा
अध बिच में रुळ ज्याज्यो रै।।
पर मंडली मत ज्याजे रै,
पर मंडली रा नहीं भरोसा
अध बिच में रुळ ज्याज्यो रै,
पर मंडली मत ज्याजे रै
पर मंडली रा नहीं भरोसा।