Thursday, June 4, 2026

ऐसा लगन लिखाया गुरुजी 

 

 ऐसा ऐसा लगन लिखाया गुरुजी मारा,
 ऐसा ऐसा लगन लिखाया रे,
 जनम जनम से कुवारी मारी सुरता,
अबके ब्याह रचाया रे ||


 हरी नाम की हल्दी लगाई,
चित का चन्दन लगाया है,
दया धरम की मेहंदी लगाई,
 लाल लाल रंग आया है ||


 आला लीला बाँस कटाया,
 मोतिया सु मण्डप सजाया हे,
 अरे पांच पच्चीसा सहेल्यां मिल कर,
मंगला गितड़ा गाया है ||


 धूम धड़ाका सु चली रे बराता,
आछा बेण्ड बजाया हे,
आगे आगे बेंड बजत हे,
बारातियो को नचाया हे ||


 अरे सूरत नुरत दोई फेरा फरिया,
 कन्या दान कराया है,
अरे सतगुरु शरण रबी दास बोल्या,
बींद परण ने आया है ||

 ऐसा ऐसा लगन लिखाया गुरुजी मारा,
ऐसा ऐसा लगन लिखाया रे ||
जनम जनम से कुवारी मारी सुरता,
अबके ब्याह रचाया रे ||