Saturday, September 30, 2023

एक आसरो देव धणी रो



एक आसरो देव धणी रो 
एक आसरो देव धणी रो,
दूजो माँ कंकाली को |
जग जननी चित्तोड़ बिराजे,
नाम जपु कंकाली को।

सांचा मन सु सुमिरन कर लो,
साँचो शरणों माँ जी को ।
शिखर चढ़ ने दर्शन कर लो,
किलो बण्यो कंकाली को ।
एक आसरो देव धणी रो,
दूजो माँ कंकाली को । टेर।

सतयुग की लक्ष्मी कहाई 
सतिया रो दुःख हरने को।
द्वापर युग में नाम धरायो,
संग है किशन कन्हाई को ।
एक आसरो देव धणी रो,
दूजो माँ कंकाली को । टेर । .

क्रेता जनक दुलारी जानकी,
जनक प्रतिज्ञा धारी को ।
दशरथ के घर राम रघुराई,
सीता राज दुलारी को ।
एक आसरो देव धणी रो,
दूजो माँ कंकाली को । टेर ।

कलयुग माही बाजी कलिका,
किला फ़तेह कराने को
 बादशाह की फोजा मारी,
राणा जीतन हारी को ।
एक आसरो देव धणी रो,
दूजो माँ कंकाली को । टेर ।

 दिल्ली सु अकबर चढ़ आयो,
दोडा धाक जमाने को ।
पदमनी की पुकार सुनता,
सतिया लाज रखाने को ।
एक आसरो देव धणी रो,
दूजो माँ कंकाली को । टेर

अनधन रूप की हर कोई मांगे,
पुत्र देवे भगतानी को ।
क्षत्राणी शक्ति सु मांगे,
दे धन रूप दिलाने को ।
एक आसरो देव धणी रो,
दूजो माँ कंकाली को। टेर ।

एक आसरो देव धणी रो,
जो माँ कंकाली को |
जग जननी चित्तोड़ बिराजे,
नाम जपु कंकाली को |
नाम जपु कंकाली को |नाम जपु कंकाली को |नाम जपु