एक आसरो देव धणी रो एक आसरो देव धणी रो, दूजो माँ कंकाली को | जग जननी चित्तोड़ बिराजे, नाम जपु कंकाली को।
सांचा मन सु सुमिरन कर लो, साँचो शरणों माँ जी को । शिखर चढ़ ने दर्शन कर लो, किलो बण्यो कंकाली को । एक आसरो देव धणी रो, दूजो माँ कंकाली को । टेर।
सतयुग की लक्ष्मी कहाई सतिया रो दुःख हरने को। द्वापर युग में नाम धरायो, संग है किशन कन्हाई को । एक आसरो देव धणी रो, दूजो माँ कंकाली को । टेर । .
क्रेता जनक दुलारी जानकी, जनक प्रतिज्ञा धारी को । दशरथ के घर राम रघुराई, सीता राज दुलारी को । एक आसरो देव धणी रो, दूजो माँ कंकाली को । टेर ।
कलयुग माही बाजी कलिका, किला फ़तेह कराने को बादशाह की फोजा मारी, राणा जीतन हारी को । एक आसरो देव धणी रो, दूजो माँ कंकाली को । टेर ।
दिल्ली सु अकबर चढ़ आयो, दोडा धाक जमाने को । पदमनी की पुकार सुनता, सतिया लाज रखाने को । एक आसरो देव धणी रो, दूजो माँ कंकाली को । टेर
अनधन रूप की हर कोई मांगे, पुत्र देवे भगतानी को । क्षत्राणी शक्ति सु मांगे, दे धन रूप दिलाने को । एक आसरो देव धणी रो, दूजो माँ कंकाली को। टेर ।
एक आसरो देव धणी रो, जो माँ कंकाली को | जग जननी चित्तोड़ बिराजे, नाम जपु कंकाली को | नाम जपु कंकाली को |नाम जपु कंकाली को |नाम जपु |