Sunday, October 1, 2023

मैं तो गिरधर के घर जाऊँ ।

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  मैं तो गिरधर के घर जाऊँ ।

 गिरधर म्हाँरो साँचो प्रीतम,
देखत रूप लुभाऊँ ॥

रैण पड़ै तब ही उठि जाऊँ,
 भोर भये उठि आऊँ ।

रैण दिना वाके संग खेलूं,
ज्यूं त्यूं ताहि रिझाऊँ ॥

जो पहिरावै सोई पहिरूँ,
 जो दे सोई खाऊँ ।

मेरी उनकी प्रीत पुराणी,
 उण बिन पल न रहाऊँ ॥

जहाँ बैठावे तितही बैठूं ,
बेचै तो बिक जाऊँ ।


 मीरा के प्रभु गिरधर नागर,
 बार बार बलि जाऊँ ॥ 
 
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