थाने निवण करा मै बारम्बार, जगदंबा म्हारी अरज सुणो अर्जी सुणो म्हारी विनती सुणो थाने निवण करू में बारम्बार, जगदम्बा म्हारी अरज सुणो ॥
बिकाजी ने वचन दियो माँ गढ़ रे नींव लगाए । देशनोक मे भवन बनायो बीकाणो नगर बसायो रे ॥ जगदम्बा म्हारी अर्ज सुणो ।
सेखो जी मुल्तान कैद में घर बाई रो व्याव । बनके कावली पकड़ पंजा में, फेरा सुपेला पहुंचाया रे ॥ जगदम्बा म्हारी अरज सुणो । गंगा सिंह रे रही मदद मे मा अँग्रेज़ा री हाट। अँग्रेज़ा ने कुबुद्धि कराई सुतोड़ा सिंह जगायो रे ॥ जगदम्बा म्हारी वीणती सुणो ।
सिंह गरज कर आयो गंग पर हाथल रोकी माय । मेहर हुई जगदम्बा तेरी सिंहड़ा ने दीनो भगाय रे ॥ जगदम्बा म्हारी अरज सुणो ।
गांव सिराणी जात ब्रहामण दलुराम जस गाय । करणसिंह ने अविचल राखो देशनोक रे माय ॥ जगदम्बा म्हारी अरज सुणो ।
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