जगत में संतो री गत न्यारी
जप तब नेम व्रत और पूजा
प्रेम सभी से भरी !
जाती वर्ण हरि राखी वे तो
गणिका ने क्यों तारी ।
शिवरी जात री भीलनी कहिजे
कुटिल कुल नारी ॥
जात जलावो नाम कबीरो
भाया करी कलाली ।
वण वणजारो बालद ले आयो
आपो आप मुरारी ॥
धना भगत ओर कालू सेना
नामो नाम हदारी ।
कर्मा जाटणी मीरा बाई कई
हो गया भव से पारी ॥
पासो पांडवो यग रसायो
सब मल करी तैयारी ।
वाल्मीकि विन काज न सरियो
बाजियों संख सुजारी ॥
वेद पुराण भागवत गीता
सब मिल आई पुकारी।
केह सुखदेव सुणो गुरूदाता
काज किना रे मुरारी ॥