Saturday, June 6, 2026

 श्री भैरव चालीसा



 दोहा
 श्री गणपति गुरु गौरि पद
 प्रेम सहित धरि माथ ।
 चालीसा वन्दन करौं
 श्री शिव भैरवनाथ ॥

 श्री भैरव संकट हरण
मंगल करण कृपाल ।
 श्याम वरण विकराल वपु
 लोचन लाल विशाल ॥

 जय जय श्री काली के लाला ।
 जयति जयति काशी-कुतवाला ॥

 जयति बटुक-भैरव भय हारी ।
 जयति काल-भैरव बलकारी ॥

 जयति नाथ-भैरव विख्याता ।
जयति सर्व-भैरव सुखदाता ॥

 भैरव रूप कियो शिव धारण ।
भव के भार उतारण कारण ॥

 भैरव रव सुनि ह्वै भय दूरी ।
 सब विधि होय कामना पूरी ॥

 शेष महेश आदि गुण गायो ।
 काशी-कोतवाल कहलायो ॥

 जटा जूट शिर चंद्र विराजत ।
 बाला मुकुट बिजायठ साजत ॥

 कटि करधनी घूँघरू बाजत ।
 दर्शन करत सकल भय भाजत ॥

 जीवन दान दास को दीन्ह्यो ।
कीन्ह्यो कृपा नाथ तब चीन्ह्यो ॥

 वसि रसना बनि सारद-काली ।
 दीन्ह्यो वर राख्यो मम लाली ॥

 धन्य धन्य भैरव भय भंजन ।
जय मनरंजन खल दल भंजन ॥

 कर त्रिशूल डमरू शुचि कोड़ा ।
 कृपा कटाक्श सुयश नहिं थोडा ॥

 जो भैरव निर्भय गुण गावत ।
 अष्टसिद्धि नव निधि फल पावत ॥

 रूप विशाल कठिन दुख मोचन ।
क्रोध कराल लाल दुहुँ लोचन ॥

 अगणित भूत प्रेत संग डोलत ।
 बं बं बं शिव बं बं बोलत ॥

 रुद्रकाय काली के लाला ।
 महा कालहू के हो काला ॥

 बटुक नाथ हो काल गँभीरा ।
 श्वेत रक्त अरु श्याम शरीरा ॥

 करत नीनहूँ रूप प्रकाशा ।
भरत सुभक्तन कहँ शुभ आशा ॥

रत्न जड़ित कंचन सिंहासन ।
व्याघ्र चर्म शुचि नर्म सु‍आनन ॥

 तुमहि जाइ काशिहिं जन ध्यावहिं ।
 विश्वनाथ कहँ दर्शन पावहिं ॥

जय प्रभु संहारक सुनन्द जय ।
 जय उन्नत हर उमा नन्द जय ॥

 भीम त्रिलोचन स्वान साथ जय ।
 वैजनाथ श्री जगतनाथ जय ॥

 महा भीम भीषण शरीर जय ।
 रुद्र त्रयम्बक धीर वीर जय ॥

 अश्वनाथ जय प्रेतनाथ जय ।
स्वानारुढ़ सयचंद्र नाथ जय ॥

 निमिष दिगंबर चक्रनाथ जय ।
गहत अनाथन नाथ हाथ जय ॥

 त्रेशलेश भूतेश चंद्र जय ।
 क्रोध वत्स अमरेश नन्द जय ॥

 श्री वामन नकुलेश चण्ड जय ।
 कृत्याऊ कीरति प्रचण्ड जय ॥

 रुद्र बटुक क्रोधेश कालधर ।
 चक्र तुण्ड दश पाणिव्याल धर ॥

 करि मद पान शम्भु गुणगावत ।
 चौंसठ योगिन संग नचावत ॥

 करत कृपा जन पर बहु ढंगा ।
 काशी कोतवाल अड़बंगा ॥

 देयँ काल भैरव जब सोटा ।
 नसै पाप मोटा से मोटा ॥

 जनकर निर्मल होय शरीरा ।
 मिटै सकल संकट भव पीरा ॥

 श्री भैरव भूतोंके राजा ।
 बाधा हरत करत शुभ काजा ॥

 ऐलादी के दुःख निवारयो ।
 सदा कृपाकरि काज सम्हारयो ॥

 सुन्दर दास सहित अनुरागा ।
 श्री दुर्वासा निकट प्रयागा ॥

 श्री भैरव जी की जय लेख्यो ।
सकल कामना पूरण देख्यो ॥
 दोहा
 जय जय जय भैरव बटुक
स्वामी संकट टार ।
 कृपा दास पर कीजिए
 शंकर के अवतार ॥