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Wednesday, June 10, 2026


म्हारा जनम 
जनम रा साथी,
 थाँने नहिं बिसरूँ दिन राती, 

थाँ देख्याँ बिन कल न पड़त है,
 जाणत मोरी छाती,
ऊँची चढ़ चढ़ पंथ निहारूँ, 
रोय-रोय अँखिया राती,

ओ सँसार सकल जग झूँठो,
 झूँठा कुल और न्याती,
दोउ कर जोड्याँ अरज करूँ 
 सुणल्यो म्हारी बाती,

ओ मन मेरो बड़ो हरामी,
 ज्यूँ मदमातो हाथी,
सतगुरू हाथ धरियो सिर ऊपर,
आँकुस दे समझाती,

पल पल पीव को रूप निहारूँ, 
निरख निरख सुख पाती,
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर,
 हरि चरणाँ चित राती,

म्हारा जनम जनम रा साथी, 
थाँने नहिं बिसरूँ दिन राती,