Wednesday, June 3, 2026

 गुरां सा शरण आपके आया।


(श्री रोयल साहबजी ) [ मध्यमा ]

 गुरां सा शरण आपके आया।
 दिल की दुविधा रही ना कोई,
 दर्द मिटया सुख पाया ॥ टेर ॥


 ज्ञान भाण घट अन्दर उगा
अखै जोत लिव लाया।
जिन कारण जग फिरे उदासी
सो घट भीतर पाया ॥


 काम क्रोध का दागा नहीं लागे,
 मोह व्यापे नहीं माया।
 करम क्लेश लेश नहीं उनके,
 सोहम शहर बसाया ॥


आद अन्त का भय नहीं मेरे,
चित्त चेतन में लाया।
 कर सिंवरण घट परचा पाया
फेर धरुँ नहीं काया ॥


 पंछी का खोज मीन का मारग
 सतगुरु मोही लखाया।
'रोयल' रतन अमोलक लादा
भाग बड़ा जिन पाया।