Saturday, June 6, 2026

  सन्त माली लिखमीदास जी की बाणी 
 ( मध्यमा)

 सन्ता बिना निवण कुण तिरिया
 आदू अन्त निवण पद मोटो,
 साद संतां री क्रिया । ।टेर ॥


नाभ कमल में चेतन चौको,
 मनपति आसन धरिया ।
आसन मार अडिग होय बैठा,
 अजपा सुमिरन करिया ॥ १ ॥

निवण-२ म्हारा माता-पिता ने,
 उत्पत्ति पालन करिया ।
 निवण-२ इस धरती माता ने
 जिसके ऊपर फिरिया ॥ २ ॥


 निवण-२ म्हारा गुरुदेव ने,
हृदय उजाला करिया
 निवण-२ इण सत संगत ने,
इसमें बैठ सुधरिया ।।३ ॥

 निवण-२ म्हारा अन्न देवता ने,
जिससे ओदर भरिया ।
 बिना पाल भवसागर भरिया,
 गुरु चरणां उबरिया

गुरु खिंवजी के शरणे "लिखमो "
 फेरा चौरासी का टलिया ॥ ६ ॥