सन्त आदूराम जी की वाणी
(मध्यमा)
भक्ति राजी होय न कीजे ।
जो धारो मायलो कोनी माने,
दोष गुरु ने मत दीजे ।। टेर ॥
पहले दिल अपणों मन प्रमोदो
पछे पाँवण्डो दीजे।
कर श्रद्धा सतगुरजी के आगे
पछे हिम्मतहार मतरी जे ॥१॥
कुबद कठोर झूठे और निन्दा
ऐ पहले तज दीजे।
तन मन धन शीश आपणो,
गुरां जी के अर्पण कीजे ॥२
इडा पिंगला जोब जुगत से,
घर सुखमण का लीजे।
त्रिवेणी के रंग महल में,
उनमुन आसन कीजे ॥३॥
सतगुरु सैन तिरबा की बताई,
आ हृदय रख लीजे।
'आदूराम' गुरांजी के शरणे,
जीवत मोक्ष कर लीजे ॥१४ ॥