सब रंग में फकीरी रंग बडो मस्तानी।
जाके लाग्या शबद का बाण छोडी रजधानी।।
राजपाट के पल में ठोकर मारी
ऐसा था भरतरी भूप बड़ा बलकारी
जब ज्ञान हुआ तो छोडी पिंगला रानी.
जाके लाग्या शबद का बाण छोडी रजधानी।।
गोपीचंद ने माता यों समझाये
बणजा रे बेटा जोगी काळ कदे नहीं खावे ,
जब समझ गया तो मिट गई खीचातानी ,
जाके लाग्या शबद का बाण छोडी रजधानी।।
तुलसीदास ने तिरिया वचन सुणाया
पिया करो रामजी से हेत या झूटी माया
आखिर जब तुलसी बोल्या रामजी की बाणी
जाके लाग्या शबद का बाण छोडी रजधानी।।
बलख बुखारा का बादशाह था भारी
वाणी के बोध से माया छोड़ ग्यो सारी
कहे चेतन भारती नहीं किसी से ठानी,
जाके लाग्या शबद का बाण छोडी रजधानी।।
सब रंग में फकीरी रंग बडो मस्तानी।
जाके लाग्या शबद का बाण छोडी रजधानी।।