Monday, June 8, 2026

 जितना दिया सरकार ने मुझ को, उतनी मेरी औक़ात नहीं

ये तो करम है उन का वर्ना मुझ में तो ऐसी बात नहीं

तू भी वहीं पर जा कि जहाँ पर सब की बिगड़ी बनती है

 एक तेरी तक़दीर बनाना उन के लिए कुछ बात नहीं

तू भी वहीं पे जा जिस दर पर सब की बिगड़ी बनती है 

एक तेरी तक़दीर बनाना इन के लिए कुछ बात नहीं

जो हैं मेरी जान-ओ-इमाँ, क्या मैं उन की नज़ करूँ

 पास मेरे अश्कों के अलावा और कोई सौगात नहीं

'इश्क़-ए-शह-ए-बतहा से पहले मुफ़्लिस-ओ-खस्ता हाल था 

मैं नाम-ए-मुहम्मद के मैं कुर्बा, अब वो मेरे हालात नहीं

ज़िक्र-ए-नबी में जो दिन गुज़रे, वो दिन सब से बेहतर है 

याद-ए-नबी में रात जो गुज़रे, उस से बेहतर रात नहीं

ग़ौर तो कर, सरकार की तुझ पर कितनी ख़ास 'इनायत है कौसर !

 तू है उन का सना-ख़्वाँ, ये मा मूली बात नहीं

शायर:

मौलाना कौसर नियाज़ी