।। सर्वेया ।।
कहत सभी मोहे ब्रह्म बतावो,
पर ब्रह्म नहीं फिर कहा बताऊं ।
कूद गये दरियाव के भीतर,
नीर अथाह किम थाग लगाऊं ।
ताल या कूप को नीर जो होय तो,
जाय तले कुछ चीज भी लाऊं ।
उपमा जिनकी दरियावत है,
दरिया में कद के फिर किम आऊं।
नृप मान कहे नहीं वरण सकूं,
वरण तो जवे दूजो दरसाऊँ ।
'मेरो' 'मैं' मुझको कैसे कहूँ,
सव में जो पूरण एक समाऊँ ।।