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Friday, July 24, 2026

।। सर्वेया ।।

कहत सभी मोहे ब्रह्म बतावो, 

पर ब्रह्म नहीं फिर कहा बताऊं ।

 कूद गये दरियाव के भीतर,

 नीर अथाह किम थाग लगाऊं ।

 ताल या कूप को नीर जो होय तो,

 जाय तले कुछ चीज भी लाऊं ।

 उपमा जिनकी दरियावत है,

 दरिया में कद के फिर किम आऊं।

 नृप मान कहे नहीं वरण सकूं, 

वरण तो जवे दूजो दरसाऊँ ।

 'मेरो' 'मैं' मुझको कैसे कहूँ, 

सव में जो पूरण एक समाऊँ ।।