←Back

Showing posts with label अलख कहै सो आलसी. Show all posts
Showing posts with label अलख कहै सो आलसी. Show all posts

Saturday, July 4, 2026

अलख कहै सो आलसी,

अलख कहै सो आलसी


चतुरसिंह जी बावजी

 अलख कहै सो आलसी, लख के वे नादान |
 अलख लखी रो आसरो, उद्या अलख पिछाण ।।

 बकरी चरगी नार ने, पालो पाती जांण ।
 वीं बकरी रो ग्वाल है, उद्या अलख पछाण ।।

 कागद कीड़ी रे जश्यो, वीं में वेद कुराण |
 वीं में अक्षर एक नी, उद्या अलख पिछाण ।।

 बाहर केवे बावला, अंतर कहे अजाण । 
बाहर अंतर एक सो, उदग्या अलख पिछाण ।।

 देबारी में उदयपुर, उदियापुर में राण 
वीरेराण दिवाण है, उद्या अलख पिछाण ।।

 देखूं देखूं छोड़ने, दीखूं दूखूं ठांण।
 ई दूखूं रो देखणों, उद्या अलख पिछाण।।

 जाणे सोही जाणसी, या अण जाणी जाण ।
 नीतर ऊंधी ताणसी, उद्या अलख पिछाण ।।

 सुखा चणनै सामटा, काचा सूप गोळ 
वो दन वीसरणो नहीं, लाल रंग री लोळ ॥

 रेल दोड़ती ज्यूं घणा, रूख दोड़ता देख ।
 तन नै जातो जाण यूं दन नै जातो देख॥

 पड़ी दड़ी पहचाण लै, घड़ी व्है घाट ।
 काढैगा कतराक दन, वना तेल री वाट ॥ 

जणी जणी नै जोय मत, ध्यान धणी रो खोय।
 वणी अणी री वगत में, कूण कणी रो होय ॥

 कई काठ ने क़िस्त दे, किस्त काळ री टाळ ।
 झूठी बाजी जीत' नै मनख जनम मत हार ॥ 

गोखड़िया अड़िया रया, कड़िया आंकणहार । 
खड़खड़िया पड़िया रया, खड़िया हाकणहार ॥

 गेला नै जोतो कहै, जावै आप अजाण । 
गेला ने रेवै नहीं, गेला री पछाण ॥

 कर क्षणभंग शरीर रो, मलणो धूल कबूल ।
 पापी रा पग पै कई फूल रियौ रे भूल ॥ 

धन दारा रै मांयने, मती जमारो खोय । 
वणी अणी रा वगत में, कूण कणी रा होय ॥ 

धरम धरम सब एक है, पण वरताव अनेक
 ईए जाणणो धरम है, जीरो पंथ विवेक ॥

 पर घर पण नी मेळणी वना मान मनवार 
अंजन आये देखने, सिंगल से सतकार ॥

 वणी सूत री सींदरी, वणी सूत री पाग 
बंधवा बंधवा में फरक, जरयो जणी से भाग ॥

 उपजे आपो आप ही भाग प्रमाणे लाग 
कोइक पीटे ताकियां, कोइक खेचें खाग ॥ 

मते मोकळा मनख पण मले न मनखाचार।

 फोगट फोनोग्राफ ज्यू वातां रो बेवार