Tuesday, June 9, 2026

अलख कहै सो आलसी,

अलख कहै सो आलसी


चतुरसिंह जी बावजी

 अलख कहै सो आलसी, लख के वे नादान |
 अलख लखी रो आसरो, उद्या अलख पिछाण ।।

 बकरी चरगी नार ने, पालो पाती जांण ।
 वीं बकरी रो ग्वाल है, उद्या अलख पछाण ।।

 कागद कीड़ी रे जश्यो, वीं में वेद कुराण |
 वीं में अक्षर एक नी, उद्या अलख पिछाण ।।

 बाहर केवे बावला, अंतर कहे अजाण । 
बाहर अंतर एक सो, उदग्या अलख पिछाण ।।

 देबारी में उदयपुर, उदियापुर में राण 
वीरेराण दिवाण है, उद्या अलख पिछाण ।।

 देखूं देखूं छोड़ने, दीखूं दूखूं ठांण।
 ई दूखूं रो देखणों, उद्या अलख पिछाण।।

 जाणे सोही जाणसी, या अण जाणी जाण ।
 नीतर ऊंधी ताणसी, उद्या अलख पिछाण ।।

 सुखा चणनै सामटा, काचा सूप गोळ 
वो दन वीसरणो नहीं, लाल रंग री लोळ ॥

 रेल दोड़ती ज्यूं घणा, रूख दोड़ता देख ।
 तन नै जातो जाण यूं दन नै जातो देख॥

 पड़ी दड़ी पहचाण लै, घड़ी व्है घाट ।
 काढैगा कतराक दन, वना तेल री वाट ॥ 

जणी जणी नै जोय मत, ध्यान धणी रो खोय।
 वणी अणी री वगत में, कूण कणी रो होय ॥

 कई काठ ने क़िस्त दे, किस्त काळ री टाळ ।
 झूठी बाजी जीत' नै मनख जनम मत हार ॥ 

गोखड़िया अड़िया रया, कड़िया आंकणहार । 
खड़खड़िया पड़िया रया, खड़िया हाकणहार ॥

 गेला नै जोतो कहै, जावै आप अजाण । 
गेला ने रेवै नहीं, गेला री पछाण ॥

 कर क्षणभंग शरीर रो, मलणो धूल कबूल ।
 पापी रा पग पै कई फूल रियौ रे भूल ॥ 

धन दारा रै मांयने, मती जमारो खोय । 
वणी अणी रा वगत में, कूण कणी रा होय ॥ 

धरम धरम सब एक है, पण वरताव अनेक
 ईए जाणणो धरम है, जीरो पंथ विवेक ॥

 पर घर पण नी मेळणी वना मान मनवार 
अंजन आये देखने, सिंगल से सतकार ॥

 वणी सूत री सींदरी, वणी सूत री पाग 
बंधवा बंधवा में फरक, जरयो जणी से भाग ॥

 उपजे आपो आप ही भाग प्रमाणे लाग 
कोइक पीटे ताकियां, कोइक खेचें खाग ॥ 

मते मोकळा मनख पण मले न मनखाचार।

 फोगट फोनोग्राफ ज्यू वातां रो बेवार