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Saturday, September 30, 2023

जबरा जंगल में बैठी आवरा



जबरा जंगल में बैठी आवरा ।
जग जननी जनम सुधार ।
 राठोडा कुल मजेदार,
लीनो अवतार ।

मंदिर बनियो बिच पहाड़, 
लागे सोभा अनंत अपार । 
सामे सरवर लम्बी पाल, 
पिछवाड़े बाजार ।

सामे तो मूरत लागे सोवनी,
सुन्दर पुष्पा रो श्रृंगार । 
साडी सुरंगी लचदार, 
जड़िया जरकस तार।

शंख सेवा में विष्णु पुरियो, 
ब्रह्मा चारो वेद उचार | 
करे रे ध्यान त्रिपुरार, 
थारे दरबार

52 भेरू ने चौसठ जोगणीया, 
निश दिन गावे मंगला चार । 
भक्तो री भीड़ अपार
,थारे दरबार ।

दुखियारा दुःख माँ
 पल में मेट दो, 
जननी दया दृस्टि धार । 
मरता प्राणी रो प्राण उभार, 
नाव डूबी जास्वर्ण 
मुखुत सोवे शीश पर, 
केशर कुमकुम तिलक ललाट ।
 
चढ़े मिष्ठान भर भर
 थाल,नाना प्रकार ।
नाहर ओढे बोले मोरिया. 
बोले कोयल राग मिलाय । 
शंख सेहेनाइ बाजे लार, 

जालर री झंकार भक्ति 
बजरी चेन राम को, 
शिव शक्ति को आधार ।
नाना शम्भू है बंसी लाल,
 गावे बारम्बार ।

जबरा जंगल में बैठी आवरा ।
 जग जननी जनम सुधार । 
राठोडा कुल मजेदार,
लीनो अवतार । ।
लीनो अवतारलीनो अवतार लीनो अवतार लीनो अवतार