जबरा जंगल में बैठी आवरा । जग जननी जनम सुधार । राठोडा कुल मजेदार, लीनो अवतार ।
मंदिर बनियो बिच पहाड़, लागे सोभा अनंत अपार । सामे सरवर लम्बी पाल, पिछवाड़े बाजार ।
सामे तो मूरत लागे सोवनी, सुन्दर पुष्पा रो श्रृंगार । साडी सुरंगी लचदार, जड़िया जरकस तार।
शंख सेवा में विष्णु पुरियो, ब्रह्मा चारो वेद उचार | करे रे ध्यान त्रिपुरार, थारे दरबार ।
52 भेरू ने चौसठ जोगणीया, निश दिन गावे मंगला चार । भक्तो री भीड़ अपार ,थारे दरबार ।
दुखियारा दुःख माँ पल में मेट दो, जननी दया दृस्टि धार । मरता प्राणी रो प्राण उभार, नाव डूबी जास्वर्ण मुखुत सोवे शीश पर, केशर कुमकुम तिलक ललाट । चढ़े मिष्ठान भर भर थाल,नाना प्रकार । नाहर ओढे बोले मोरिया. बोले कोयल राग मिलाय । शंख सेहेनाइ बाजे लार,
जालर री झंकार भक्ति बजरी चेन राम को, शिव शक्ति को आधार । नाना शम्भू है बंसी लाल, गावे बारम्बार ।
जबरा जंगल में बैठी आवरा । जग जननी जनम सुधार । राठोडा कुल मजेदार, लीनो अवतार । । लीनो अवतारलीनो अवतार लीनो अवतार लीनो अवतार |