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Saturday, July 4, 2026

 

तू दयालु ,दीन हौं
 तू दानि, हौं भिखारी।
 हौं प्रसिद्ध पातकी,
 तू पाप-पुंज-हारी ॥ १ ॥
ghghshhsh
 नाथ तू अनाथको,
 अनाथ कौन मोसो
मो समान आरत नहिं,
 आरति हर तोसो ॥ २ ॥


 ब्रह्म तू, हौं जीव,
 तू है ठाकुर,हौं चेरो।
तात-मात,गुरु-सखा,
 तू सब बिधि हितु मेरो ॥ ३ ॥

 तोहिं मोहिं नाते अनेक,
 मानियै जो भावै।
 ज्यों त्यों, तुलसी कृपालु !
 चरन-सरन पावै ॥ ४ ॥