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Saturday, July 4, 2026

फकीरी नहीं कायर का काम 

  

श्री मोहनपुरीजी  [ मध्यमा ]

फकीरी नहीं कायर का काम ।
 शूरा लड़ाई सन्मुख रहवे,
 हर दम आठों याम ॥ टेर ॥


 शीश उतार चरण गुरु धर दे,
 शूरा जनको काम ।
बढ़े आगे नहीं पीछे हटना,
करे घोर संग्राम ॥


 रिपु मर्दन करता बढ़ जावे,
जीत लेवे मैदान ।
 दुर्गम किला यत्न से तोड़े,
कायर करे पलान ॥


 कायर सन्मुख कैसे आवे,
माया तजे गुलाम ।
 शूर संत जत मत से पकड़े
 देवे लगा लगाम ॥

 ज्वालापुरी गुरु हमें पिलाया,
मस्त फकीरी जाम।
मोहनपुरी शरण सतगुरु के
 चरण कमल में धाम ॥