फकीरी नहीं कायर का काम
श्री मोहनपुरीजी [ मध्यमा ]
फकीरी नहीं कायर का काम ।
शूरा लड़ाई सन्मुख रहवे,
हर दम आठों याम ॥ टेर ॥
शीश उतार चरण गुरु धर दे,
शूरा जनको काम ।
बढ़े आगे नहीं पीछे हटना,
करे घोर संग्राम ॥
रिपु मर्दन करता बढ़ जावे,
जीत लेवे मैदान ।
दुर्गम किला यत्न से तोड़े,
कायर करे पलान ॥
कायर सन्मुख कैसे आवे,
माया तजे गुलाम ।
शूर संत जत मत से पकड़े
देवे लगा लगाम ॥
ज्वालापुरी गुरु हमें पिलाया,
मस्त फकीरी जाम।
मोहनपुरी शरण सतगुरु के
चरण कमल में धाम ॥